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| दादा भाई नौरोजी |
दादा भाई नौरोजी
जन्म स्थान : 4 सिंतबर 1925 नवसारी मुंम्बई
मृत्यु : 30 जून 1917 मुंबई
संस्था : भारतीय राष्ट्रीय कॉग्रेस के संस्थापक सदस्य,
ज़ोरोस्ट्रियन ट्रस्ट फण्ड ऑफ़ यूरोप ,
लंदन इंडियन सोसाइटी (1865 ),
ईस्ट इंडिया एसोसिएशन (1867 )
अध्ययन : बॉम्बे विश्विद्यालय , एल्फिस्टन कॉलेज
अध्ययन : बॉम्बे विश्विद्यालय , एल्फिस्टन कॉलेज
पुस्तकें :पॉवर्टी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया(1901 ), पावर्टी ऑफ़ इंडिया (1876 ),
द यूरोपियन एंड एशियाटिक रेसेस (1866), द मैनर्स एंड कस्टम ऑफ़ पारसी (1862 )
जीवन दर्शन : इनका जन्म मुंबई में एक पारसी परिवार में हुआ था। इनकी शिक्षा मुंबई के एल्फिस्टन इंस्टिट्यूट में हुई। जहॉं पर बाद में इन्होंने अध्यापक के रूप में कार्य किया। आगे चलकर वे इस संस्था में गणित के प्रोफेसर बन गये जो कि उस समय भारतीयों के लिए शैक्षणिक संस्थाओं में सबसे बडा पद था। आगे चलकर उन्होने 'स्टूडेंट लिटरेरी एंड सांइटिफिक सोसाइटी' के प्रतिष्ठाता के रूप में कार्य किया। इसकी दो शाखाऐं थी, एक मराठी ज्ञान प्रसारक मंडली और दूसरी गुजराती ज्ञान प्रसारक मंडली इन सभी की स्थापना इन्होंने की थी । 'रास्त गफ्तार' नामक अपने समय के समाज सुधारकों के प्रमुख पत्र का संपादन तथा संचालन भी इन्होंने किया।
मुख्य बिन्दु :
मुख्य बिन्दु :
- वर्ष 1855 में इग्लेंड में पहली भारतीय कम्पनी स्थापित करने के लिए लन्दन चले गये । जहाँ पर वे लिवरपूल में स्थापित कामा एंड कंपनी के हितधारको में से एक बन गये।
- वर्ष 1859 में दादा भाई नौरोजी ने युनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में गुजराती के प्राफेसर के रूप में कार्य किया।
- भारतीय सामाजिक.आर्थिक और राजनीतिक स्थिति से निपटने के लिए दादा भाई नौरोजी ने वर्ष 1865 में लंदन इंडियन सोसाइटी की स्थापना की।
- वे वर्ष 1885 से वर्ष 1888 तक बॉम्बें के विधान परिषद् सदस्य बने और उन्होंने वर्ष 1874 में बड़ौदा के प्रधानमंत्री(दीवान ) के पद पर कार्य किया।
- दादा भाई नौरोजी सर सुरेन्द्रनाथ बनर्जी द्वारा स्थापित इंडियन नेशनल एसोसिएशन के सदस्य भी रहे। यह संगठन बाद में इंडियन नेशनल कॉग्रेस के रूप में स्थापित हुआ। वर्ष 1886 में वे पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस के अध्यक्ष चुने गये। इसके बाद पुन: वर्ष 1893 एवं 1906 में भी भारतीय राष्ट्रीय कॉग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
- वर्ष 1906 में इन्होंने पहली बार स्वराज की मांग की थी।
- वर्ष 1892 में लेबर पार्टी के एम. पी. के रूप में लंदन हाउस ऑफ कॉमन्स में पहुॅंंचे ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय थे। इन्होंने 1892 से 1895 तक इस पद पर कार्य किया।
- 2 मई 1867 को लंदन में आयोजित ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की बैठक में धन की निकासी के सिद्धान्त को प्रस्तुत किया था। उन्होने अपने पत्र ''इग्लैंड डीबट टू इंडिया''( Egland debut to india ) को पढ़ते हुऐ पहली बार भारतीय धन की निकासी के सिद्धान्त को प्रस्तुत किया।
- दादा भाई नौराेेजी को ''ग्रांड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया'' तथा ''अनऑफिशियल अम्बेसडर ऑफ इंडिया'' भी कहा जाता हैं।
- ''द वान्टस एंड मीन्स ऑफ इंडिया '' और ''ऑन द कॉमर्स ऑफ इंडिया'' नामक पुस्तको में उन्होनें धन के बहिर्गमन के सिद्धान्त की व्याख्या की।
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Bahut badiya
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